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रूस की मध्यस्थतता से आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच एक बार फिर संघर्ष विराम की घोषणा

  • Writer: ab2 news
    ab2 news
  • Oct 18, 2020
  • 2 min read

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मॉस्को। आर्मेनिया और अजरबैजान ने शनिवार की देर रात एक बार फिर संघर्ष विराम की घोषणा की है। इससे एक सप्ताह पहले भी दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी मगर अगले ही दिन दोनों देशों ने एक दूसरे पर बमबारी शुरू कर दी थी। बीते 27 सितंबर से दोनों देशों के बीच शुरू हुई लड़ाई में अब तक 650 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, इसके अलावा लाखों रूपये की संपत्ति का भी नुकसान हो चुका है। लगभग 25 सालों से दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष में ये पहला मौका होगा जब इतने दिनों तक लड़ाई चली हो और इतने बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ हो। आर्मेनिया और अजरबैजान ने नागोर्नो-काराबाख के विवादित क्षेत्र पर लड़ाई के लिए रविवार मध्यरात्रि से संघर्ष विराम की घोषणा की। यह संघर्ष विराम आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति स्थापित करने का दूसरा प्रयास होगा। अर्मेनियाई विदेश मंत्री ज़ोहराब म्नात्सक्यानन और अजरबैजान के जेहुन बेयारमोव ने यह घोषणा की। शांति का दूसरा प्रयास करने का निर्णय रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के परामर्श से किया गया था। जिन्होंने दोनों देशों से ‘मॉस्को डील’का पालन करने को कहा था। 27 सितंबर को दोनों पक्षों के बीच लड़ाई भड़कने के बाद से रूस ने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच यह संघर्ष विराम का दूसरा प्रयास है। पिछले कुछ दिनों से अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच संघर्ष काफी उग्र हो गया था। दोनों देश एक दूसरे पर मिसाइलों और अन्य हथियारों से हमला करते जा रहे थे। दोनों के बीच जारी संघर्ष में रिहायशी इमारतों को भी निशाना बनाया जा रहा था जिससे जान माल का नुकसान हो रहा था। आर्मेनिया और अजरबैजान ने नागोर्नो-काराबाख को लेकर जारी तनाव के बीच एक बार फिर आधी रात से संघर्ष विराम समझौता लागू करने की कोशिश की। इससे एक सप्ताह पहले भी रूस की मध्यस्थता से दोनों के बीच संघर्ष विराम को लेकर समझौता हुआ था लेकिन इसके लागू होने के कुछ ही देर बाद इसका उल्लंघन हो गया था और दोनों पक्षों ने इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया था। उसके बाद दोनों ने बमबारी शुरू कर दी थी। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आर्मेनिया और अजरबैजान के विदेश मंत्रियों से बात करने के बाद नए समझौते की घोषणा की। नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र अजरबैजान के क्षेत्र में आता है लेकिन इस पर 1994 से आर्मेनिया समर्थित आर्मेनियाई जातीय समूहों का नियंत्रण है।

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